Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में अब नहीं चलेगा ‘पति राज’! महिला जनप्रतिनिधियों के काम में परिजनों की दखल पर सरकार सख्त…

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने नगरीय निकायों में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के स्थान पर उनके पति या अन्य परिजनों द्वारा कामकाज में हस्तक्षेप किए जाने की व्यवस्था पर सख्ती दिखाई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि महिला पार्षद, अध्यक्ष या महापौर के स्थान पर उनके पति अथवा अन्य रिश्तेदार प्रतिनिधि या समन्वयक के रूप में कार्य नहीं कर सकेंगे।

सरकार का यह फैसला उन मामलों पर रोक लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां महिला जनप्रतिनिधि के निर्वाचित होने के बावजूद उनके पति या परिवार के अन्य सदस्य बैठकों, सरकारी कार्यक्रमों और निकाय के कामकाज में उनकी जगह सक्रिय भूमिका निभाते नजर आते हैं।

महिला जनप्रतिनिधि ही निभाएंगी अपनी जिम्मेदारी-
नए प्रावधान का उद्देश्य निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों को उनके संवैधानिक और प्रशासनिक अधिकारों का स्वतंत्र रूप से इस्तेमाल करने का अवसर देना है। अब महिला पार्षद, अध्यक्ष या महापौर के पद से जुड़े कार्यों में उनके पति या परिजनों की ओर से प्रतिनिधित्व किए जाने पर रोक रहेगी।
सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के बाद नगरीय निकायों में महिला प्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर स्पष्टता आने की उम्मीद है। इससे ‘प्रॉक्सी’ के रूप में काम करने वाले परिजनों पर अंकुश लगेगा और निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की जवाबदेही भी सीधे उन्हीं की रहेगी।

7 अगस्त से लागू हुआ आदेश
रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है और 7 अगस्त 2026 से व्यवस्था को प्रभावी किया गया है। इसके बाद नगरीय निकायों में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के स्थान पर उनके पति अथवा अन्य परिवार के सदस्यों द्वारा प्रतिनिधि या समन्वयक के तौर पर काम करने की व्यवस्था समाप्त मानी जाएगी।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम
सरकार के इस निर्णय को महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नगरीय निकायों में महिलाओं को आरक्षण के माध्यम से राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिला है, ऐसे में सरकार का जोर अब इस बात पर है कि निर्वाचित महिला प्रतिनिधि स्वयं अपने पद की जिम्मेदारी संभालें और निर्णय प्रक्रिया में उनकी प्रत्यक्ष भागीदारी सुनिश्चित हो।
सरकार के इस फैसले से नगरीय निकायों में वर्षों से चली आ रही ‘पति या परिजन के जरिए प्रतिनिधित्व’ की प्रथा पर लगाम लगने की उम्मीद है।

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