चांपा में सट्टे का साम्राज्य! आईपीएल खत्म होने को, लेकिन पुलिस कार्रवाई अब तक “शून्य”….


चांपा। आईपीएल के रोमांच के साथ चांपा में क्रिकेट सट्टे का काला कारोबार भी चरम पर पहुंच चुका है। लगभग 65 मुकाबले पूरे हो चुके हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि साइबर सेल और स्थानीय पुलिस अब तक एक भी बड़ी कार्रवाई नहीं कर पाई है। शहर में खुलेआम सट्टा संचालित हो रहा है और पुलिस की निष्क्रियता अब आम जनता के बीच बड़ा सवाल बन चुकी है।
शहर और आसपास के इलाकों में सट्टा बाजार पूरी तरह सक्रिय बताया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, कई जगहों पर मोबाइल और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए लाखों रुपये का दांव लगाया जा रहा है। चर्चा यह भी है कि “सेटिंग” के दम पर सटोरिए बेखौफ होकर अपना नेटवर्क चला रहे हैं, जबकि कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित नजर आ रही है। लोगों के बीच अब यह चर्चा आम हो गई है “खुला सट्टा, बंद कार्रवाई… आखिर पुलिस किसके साथ?”
युवा पीढ़ी बर्बादी की ओर – क्रिकेट सट्टे का सबसे खतरनाक असर युवाओं और नाबालिगों पर दिखाई दे रहा है। आसान पैसे और रातोंरात कमाई के लालच में युवा अपना भविष्य दांव पर लगा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, हाल ही में चांपा का एक नाबालिग युवक सट्टे में बड़ी रकम हार गया। डर के कारण उसने अपनी मां के एटीएम कार्ड से पैसे निकालकर सटोरिए को चुका दिए। जब मामला परिवार के सामने आया तो घर में तनाव बढ़ गया और युवक नाराज होकर घर छोड़कर चला गया। कई घंटों तक उसका मोबाइल बंद रहा। बाद में दोस्तों के समझाने पर वह वापस लौटा।
यह घटना सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि उस सामाजिक खतरे की तस्वीर है जो तेजी से युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रहा है।
परिवारों की टूटती शांति – सट्टे की लत अब केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं रही। परिवारों में विवाद, मानसिक तनाव और रिश्तों में दरार लगातार बढ़ रही है। अभिभावक असमंजस में हैं—अगर बच्चों को रोकें तो विवाद, और अगर चुप रहें तो भविष्य बर्बाद होने का डर।
कार्रवाई नहीं या कार्रवाई की इच्छा नहीं? सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब नाबालिग आसानी से सटोरियों तक पहुंच रहे हैं, खुलेआम दांव लग रहे हैं, तो पुलिस आखिर क्यों नहीं पहुंच पा रही? आईपीएल अब समापन की ओर है, लेकिन अब तक चांपा में कार्रवाई के नाम पर “बोहनी” तक नहीं होना कई सवाल खड़े कर रहा है। शहर में अब लोग खुलकर कहने लगे हैं कि यदि समय रहते सट्टा नेटवर्क पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले समय में इसकी कीमत पूरे समाज को चुकानी पड़ेगी।
